जीवन की उधेड़बुन !!

जब कोई तिनका झाड़ से अलग होकर टूट जाता है तो उसे हवा का आसरा मिलता है, जब सितारा टूट जाता है उसे दुआ की आसरा मिल जाता है, परंतु जब किसी मनुष्य की अंतरात्मा पर खिलवाड़ होता है तब वह क्यों एकदम बेसहारा हो जाता है ! आखिर ऐसा क्यों ? ऐसे वक़्त .............